June 13, 2026
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UP Ambedkar Statue Scheme: ₹403 Cr Debate

  • January 29, 2024
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📌 प्रस्तावना योगी सरकार की अम्बेडकर मूर्ति योजना : 403 करोड़ की परियोजना, दलित सम्मान या जमीन हड़पने का नया तरीका? लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने डॉक्टर भीमराव

UP Ambedkar Statue Scheme: ₹403 Cr Debate

📌 प्रस्तावना

योगी सरकार की अम्बेडकर मूर्ति योजना : 403 करोड़ की परियोजना, दलित सम्मान या जमीन हड़पने का नया तरीका?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर की मूर्तियों के विकास और सुधार के लिए ‘डॉ. बीआर अम्बेडकर मूर्ति विकास योजना’ शुरू की है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इस योजना पर 403 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। पूरे राज्य की 403 विधानसभा सीटों पर 1 करोड़ रुपये प्रति सीट आवंटित कर प्रत्येक सीट पर 10 मूर्तियों तक का सौंदर्यीकरण, सीमा दीवार, छत्र (छतरी) और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे डॉक्टर अम्बेडकर और अन्य सामाजिक सुधारकों के सम्मान में बताया है।

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🏛️ सरकारी दावा और उद्देश्य

सरकार का दावा है कि योजना से मौजूदा मूर्तियों की सुरक्षा होगी, मौसम से नुकसान नहीं पहुंचेगा और आसपास के इलाकों को सुंदर बनाया जाएगा। अम्बेडकर जयंती के अवसर पर विशेष कार्यक्रमों के जरिए योजना को प्रचारित किया जाएगा। इसमें संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले और महर्षि वाल्मीकि जैसी हस्तियों की मूर्तियों को भी शामिल किया गया है।

⚖️ विपक्ष के आरोप

लेकिन विपक्षी दलों और कुछ स्थानीय संगठनों ने इस योजना पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई जगहों पर मूर्ति स्थापना या सौंदर्यीकरण के नाम पर सरकारी, सार्वजनिक या विवादित जमीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कुछ मामलों में पहले से अन्य सार्वजनिक प्रयोजनों के लिए चिह्नित भूमि को मूर्ति परियोजना में शामिल कर लिया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी देव स्थान या गांव सभा की जमीन पर बिना अनुमति अम्बेडकर मूर्ति लगाए जाने के मामले सामने आए हैं जहां अदालत ने मध्यस्थता का निर्देश दिया था।

🏗️ स्थानीय शिकायतें और विवाद

स्थानीय स्तर पर शिकायतें आ रही हैं कि कुछ ठेकेदारों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों को इन परियोजनाओं में लाभ पहुंचाया जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि मूर्तियों के नाम पर भूमि अधिग्रहण या पुनर्वर्गीकरण के जरिए मूल्यवान जमीनों को व्यावसायिक हितों के लिए तैयार किया जा रहा है। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश में विकास या स्मारक परियोजनाओं के नाम पर स्थानीय समुदायों को विस्थापित करने के आरोप लग चुके हैं।

📊 योजना का दायरा

सरकार के आंकड़ों के अनुसार योजना पहले चरण में ३१ दिसंबर तक लगाई गई मूर्तियों पर लागू होगी। प्रत्येक मूर्ति पर अधिकतम 10 लाख रुपये खर्च का प्रावधान है। इसमें सीमा दीवार, रोशनी, फूलों की क्यारियां और रखरखाव शामिल है।

📉 सामाजिक न्याय के सवा

दूसरी ओर, अनुसूचित जाति पर अत्याचार के मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश की स्थिति पर सवाल उठते रहते हैं। एनसीआरबी के पुराने आंकड़ों में उत्तर प्रदेश में ऐसे मामलों की संख्या देश में सबसे अधिक रही है। एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दोषसिद्धि दर भी कम बताई जाती रही है। आरक्षण के क्रियान्वयन और पदोन्नति में देरी के मामले भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

🗣️ सरकार का पक्ष

सरकार का पक्ष है कि अम्बेडकर और अन्य सामाजिक सुधारकों को सम्मान देना हर नागरिक का दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा था कि मूर्तियों पर छत्र लगाकर उन्हें मौसम से बचाया जाएगा और आसपास सफाई अभियान चलाया जाएगा। सामाजिक कल्याण मंत्री ने योजना को सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता बताया।

🗳️ चुनावी एंगल

विपक्षी नेता इसे चुनावी कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि प्रतीकों के जरिए दलित वोटरों को आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है जबकि मूल मुद्दों जैसे अत्याचार के मामलों में तेज न्याय, आरक्षण का सही क्रियान्वयन और भूमि वितरण पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। कुछ दलित संगठन भी कह रहे हैं कि मूर्ति सुंदर बनाने से ज्यादा अम्बेडकर के विचारों, जाति उन्मूलन और संवैधानिक अधिकारों को जमीन पर उतारना जरूरी है।

📅 चुनाव से पहले टाइमिंग

यह योजना 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आई है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पिछले लोकसभा चुनाव में कुछ दलित वोटों के रुझान को देखते हुए भाजपा सामाजिक गठबंधन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

🔍 निष्कर्ष

सरकार ने स्पष्ट किया कि योजना पूर्ण रूप से पारदर्शी तरीके से लागू की जाएगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता बरदाश्त नहीं होगी। अभी तक योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अम्बेडकर जयंती पर राज्यभर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं जहां स्थानीय जनप्रतिनिधि योजना की जानकारी देंगे।
कुल मिलाकर योगी सरकार की यह बड़ी पहल अम्बेडकर को सम्मान देने का दावा करती है लेकिन विपक्ष और कुछ स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों ने इसे विवादों के घेरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनी रहती है या फिर आरोपों का सिलसिला जारी रहता है।

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